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स्त्री रत्न के समान कोई रत्न नहीं

स्त्री रत्न के समान कोई रत्न नहीं

  • अंतरष्ट्रीय महिला दिवस पर आईएमआरटी में आयोजित महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम ने दिया सन्देश

लखनऊ, मार्च 10, 2021: राजधानी के गोमती नगर स्थित इन्स्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट रिसर्च एण्ड टेक्नोलॉजी में अंतरष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम ‘न स्त्रीरत्नमसमं रत्नम’ का वृहद् आयोजन हुआ। इस आयोजन के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में सफल रही प्रतिष्ठित महिलाओं ने छात्र-छात्राओं के साथ अपने अनुभव व सफलता की काहानी साझा की। इस कार्यक्रम ने अपने नाम को चरितार्थ करते हुए समाज को स्पष्ट रूप से सन्देश दिया कि ‘स्त्री रत्न के समान कोई रत्न नहीं।’ विगत 12 वर्षों से आईएमआरटी संस्थान शिक्षा के क्षेत्र में अपना शतप्रतिशत योगदान दे रहा है। यहाँ स्थित कालेज ऑफ़ इन्नोवेटिव मैनेजमेंट एण्ड साइंस, संचालित पाठ्यक्रम एमबीए,बीबीए, बीसीए, बीकाम, बीकाम आनर्स एवं बीएड में लगभग 2000 छात्र-छात्राएं प्रतिवर्ष शिक्षा ग्रहण कर अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान रहे हैं।

कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ववलन एवं ईश्वर की वन्दना के साथ किया गया। प्रसिद्ध ऐंकर अनुकृति गोविन्द शर्मा ने कार्यक्रम की मुख्य अथिति माननीया श्रीमती न्यायमूर्ति रेखा दीक्षित (इलाहाबाद हाईकोर्ट), सुश्री रुचिता चौधरी, आईपीएस (एसपी/ऐडिशनल डीसीपी पुलिस कमिशनरेट लखनऊ), सुश्री ईवा शर्मा, आईएफएस(जीएम, इन्डस्टीज, उत्तर प्रदेश वन निगम), डा0 रीचा चै्रधरी, एम0डी0 (एसोसियेट फ्रोफेसर, डा0 राम मनोहर लोहिया अस्पताल लखनऊ), सुश्री पूजा गुप्ता उद्योगपति अल्पाहार, सुश्री कुन्ती एवं अन्शू राजपूत (एसिड अटैक सरवाइवर शिरोज हैंगआउट) का स्वागत किया। इस अवसर पर कालेज की छात्राओं ने सांस्कृतिक नृत्य एवं समूहगीत के द्वारा नारी शक्ति की समाज और परिवेश में महत्व को दर्शाया।

इस अवसर पर बोलते हुए मुक्य अतिथि न्यायमूर्ति श्रीमती रेखा दीक्षित ने महिलाओं को अपने गुणों को पहचानने और उनकी क्षमताओं को पहचानने का आग्रह किया । उन्होंने महिलाओं को हर तरेह की घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित किया।

सुश्री पूजा गुप्ता ने महिला सशक्तिकरण का सन्देश देते हुए अपने उद्यम अल्पाहार की सफलता की खानी साझा की। उन्होंने बताया कि किस तरह वे अपने स्टार्टअप अल्पाहार के माध्यम से रोजगार प्रदान करके जरूरतमंद महिलाओं की मदद करने में सफल रहीं। उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह वे उन्होंने दो सहयोगियों की सहायता से अल्पाहार उद्यम को सफलता की ऊंचाई तक पहुंचाने में सक्षम हुईं।

सुश्री रुचिता चौधरी ने कहा कि महिलाओं को न केवल अपने लिए मौजूद अवसर को पहचानने और उसका लाभ उठाने की आवश्यकता है, बल्कि उन्हें संबंधित क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को साबित भी करना है । उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने परिवेश के चलते पिछलग्गू बनी रही हैं, जबकि वे पूरी आबादी का नेतृत्व कर सकती हैं।

सुश्री ईवा शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं की पूजा की जाती है. यह कहा भी जाता है कि भगवान यहीं निवास करते हैं। भारतीय शास्त्रों में भी महिलाओं को महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने भी पुरुषों के साथ हर मोर्चे पर समान रूप से भाग लिया। महिलाओं को अर्धांगिनी कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘पुरुष महिलाओं के बिना अधूरे हैं। उन्होंने महिलाओं को सन्देश दिया कि यदि आप पूर्ण समर्पण के साथ अपने काम को अंजाम देती है हंन तो आपको सफलता निश्चित रूप से मिलेगी। उन्होंने के छात्रों को करतनिया घाट वन्यजीव अभयारण्य, बहराइच आकर प्रकृति के बारे में जागरूकता फैलाने का आह्वाहन भी किया।

डॉ. ऋचा चौधरी ने छत्राओं सामाजिक मुद्दों के बारे में खुल कर बात करने और हर तरह के भेदभाव या लैंगिक पक्षपात के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल एक दिन नहीं बल्कि पूरे वर्ष अपने आप को खुश रखने का प्रयास करना चाहिए।

सुश्री कुंती और अंशु राजपूत ने छात्राओं के साथ अपनी दुखद घटना को साझा किया और उन्हें बताया कि उनके चेहरे पर तेजाब फेंका गया न की उनकी इच्छा और इच्छाशक्ति पर। यही कारण है कि वे निरंतर आगे बढ़ती रही और अन्य लड़कियों के लिए प्रेरणा बनी हैं।

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