Skip to main content

Posts

Showing posts with the label ADHYATM

'मानवता का धर्म' ही सभी धर्मों का सार है

'मानवता का धर्म' ही सभी धर्मों का सार है -- डा. (श्रीमती) भारती गाँधी, प्रख्यात शिक्षाविद् व संस्थापिका-निदेशिका, सी.एम.एस. लखनऊ I सिटी मोन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर ऑडिटोरियम में आयोजित विश्व एकता सत्संग में बोलते हुए सी.एम.एस. संस्थापिका-निदेशिका, प्रख्यात शिक्षाविद् एवं बहाई अनुयायी डा. भारती गाँधी ने कहा कि सभी धर्मों का सार एक ही है और वह है 'मानवता का धर्म' अर्थात सभी मनुष्यों की भलाई के लिए कार्य करना। सभी धर्म हमें एक ही ईश्वर की ओर ले जाते हैं और सभी पवित्र पुस्तकें जैसे गीता, बाइबिल, कुरान, गुरु ग्रन्थ साहब व किताबे-अकदस आदि सब यही सिखाते हैं कि हम सब एक ही परमात्मा की संताने हैंन काई ऊँचा, न कोई नीचा, मानवता ही हमारा मूल धर्म है। हमें अपना जीवन मानव कल्याण के लिए अर्पित करना चाहिए। आगे बोलते हुए डा. गाँधी ने कहा कि सत्संग भी एक प्रकार की शिक्षा है। शिक्षा के तीन रूप है – भौतिक, सामाजिक व आध्यात्मि ध्यात्मिक। यहाँ सत्संग में आध्यात्मिक शिक्षा दी जाती है। सत्संग में सभी धर्मों के अनुयायी साथ में बैठकर ईश्वर को याद करते हैं और सभी के हृदयों में एकता व शान्ति का

आत्मा अजर अमर है! मृत्यु के बाद का जीवन आनन्द एवं हर्षदायी होता है

आध्यात्मिक लेख  आत्मा अजर अमर है! मृत्यु के बाद का जीवन आनन्द एवं हर्षदायी होता है (1) मृत्यु के बाद शरीर मिट्टी में तथा आत्मा ईश्वरीय लोक में चली जाती है :विश्व के सभी महान धर्म हिन्दू, बौद्ध, ईसाई, मुस्लिम, जैन, पारसी, सिख, बहाई हमें बताते हैं कि आत्मा और शरीर में एक अत्यन्त विशेष सम्बन्ध होता है इन दोनों के मिलने से ही मानव की संरचना होती है। आत्मा और शरीर का यह सम्बन्ध केवल एक नाशवान जीवन की अवधि तक ही सीमित रहता है। जब यह समाप्त हो जाता है तो दोनों अपने-अपने उद्गम स्थान को वापस चले जाते हैं, शरीर मिट्टी में मिल जाता है और आत्मा ईश्वर के आध्यात्मिक लोक में। आत्मा आध्यात्मिक लोक से निकली हुई, ईश्वर की छवि से सृजित होकर दिव्य गुणों और स्वर्गिक विशेषताओं को धारण करने की क्षमता लिए हुए शरीर से अलग होने के बाद शाश्वत रूप से प्रगति की ओर बढ़ती रहती है। (2) सृजनहार से पुनर्मिलन दुःख या डर का नहीं वरन् आनन्द के क्षण है :हम आत्मा को एक पक्षी के रूप में तथा मानव शरीर को एक पिजड़े के समान मान सकते है। इस संसार में रहते हुए हम शारीरिक सीमाओं में बंधे रहते हैं। हमें बीमारियों तथा दुःखों को स

सी.एम.एस. गोमती नगर ऑडिटोरियम में विश्व एकता सत्संग का आयोजन 

सी.एम.एस. गोमती नगर ऑडिटोरियम में विश्व एकता सत्संग का आयोजन  बच्चों में अहिंसा के विचार डालना अतिआवश्यक -- डा. (श्रीमती) भारती गाँधी, प्रख्यात शिक्षाविद् व संस्थापिका-निदेशिका, सी.एम.एस. लखनऊ । सिटी मोन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर ऑडिटोरियम में आयोजित विश्व एकता सत्संग में बोलते हुए सी.एम.एस. संस्थापिका-निदेशिका, प्रख्यात शिक्षाविद् एवं बहाई अनुयायी डा. भारती गाँधी ने कहा कि अहिंसा सर्वश्रेष्ठ गुण है और सभी बच्चों में इस विचार का समावेश अत्यन्त आवश्यक है। इसी अहिंसा के विचार की बदौलत महात्मा गाँधी ने बिना हिंसा के ही देश को स्वतन्त्र करा लिया थाआज दुनिया में हिंसक विचारों की बाढ़ आई हुई है, विभिन्न देशों में चल रहे युद्ध और आतंकवाद जैसी चीजे इसी का परिणाम है, जिसका मुकाबल अहिंसा के विचारों का प्रचार-प्रसार करके ही किया जा सकता है। डा. गाँधी ने जोर देते हुए कहा कि दुनिया से युद्ध खत्म होना चाहिए तथा विश्व में एकता एवं शांन्ति की स्थापना होनी चाहिए और इसके लिए बच्चों में अहिंसा के विचार डालना अतिआवश्यक है। इससे पहले, विश्व एकता सत्संग का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन एवं सी.एम.एस. के संगीत शिक्ष