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हिन्दी संवाद नहीं अभिमान की भाषा है

हिन्दी संवाद नहीं अभिमान की भाषा है

  • विश्व हिन्दी दिवस पर सम्मानित हुई अर्चना सिंह
  • पहले प्रदोष पूजन दिवस पर हुआ तहरी भोज

      लखनऊ । हिन्दी महज संवाद की भाषा नहीं है बल्कि यह हमारी वैश्विक पहचान है। यह कहना है आर्ची-पिंक फिल्म प्रोडक्शन हाउस की डायरेक्टर अर्चना सिंह का। रविवार को विश्व हिन्दी दिवस पर जे.सी.फाउण्डेशन की ओर से फिल्मों के माध्यम से हिन्दी के प्रचार प्रसार के लिए उन्हें सम्मानित किया गया। उनकी आगामी फिल्म है “प्यार इसी को कहते है”।

      निराला नगर के  जे.सी.गेस्ट हाउस में आयोजित इस कार्यक्रम में फाउण्डेशन के अध्यक्ष आशीष अग्रवाल ने बताया कि विश्व हिन्दी दिवस हर साल 10 जनवरी को मनाया जाता है। दरअसल दुनिया भर में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए 10 जनवरी 1975 को सबसे पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन नागपुर में हुआ था। फाण्डेशन के उपाध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि आधुनिक युग के अनुरूप नए तकनीकी शब्दों के लिए सहज हिन्दी शब्दों के प्रयोग को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। एडवोकेट ज्योतिर्मय बैनर्जी ने कहा कि हिन्दी में वह शक्ति है जो देश की सभी भाषाओं का सम्मान करते हुए पूरे देश को एक सूत्र में बांध सकती है। चिन्मय अस्थाना ने कहा कि युवाओं को सोशल साइट्स पर अधिक से अधिक हिन्दी का प्रयोग करना चाहिए। हर्षित बंसल ने कहा कि हिन्दी की वैश्विक स्वीकार्यता अंग्रेजी के बाद सर्वाधिक है। इस अवसर पर साल के पहले प्रदोष पूजन दिवस पर निराला नगर के प्रतिष्ठित शिव मंदिन में हिन्दी वर्णमाला का पूजन किया गया और तहरी भोज का आयोजन किया गया।

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