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नेपाल से आयी महिला का प्लेसेंटा परक्रीटा की हुई सफल सर्जरी


नेपाल से आयी महिला का प्लेसेंटा परक्रीटा की हुई सफल सर्जरी


·        यह दुर्लभ स्थिति 1 लाख महिलाओं में से सिर्फ 2  में पायी जाती है


लखनऊ 13 दिसंबर 2019:  अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के डॉक्टरों ने एक  और दुर्लभ सर्जरी कर एक नहीं बल्कि  दो-दो ज़िंदगियाँ बचाई हैं। प्लेसेंटा परक्रीटा महिलाओं में होने वाली एक बहुत ही दुर्लभ प्रकार की स्थिति है जिसमें बहुत ज्यादा ब्लीडिंग के साथ मरीज के जान को जोखिम का खतरा बना रहता है। शोध के अनुसार 100000 में से सिर्फ 2 महिलाओं में यह स्थिति देखी जा सकती है। 


नेपाल निवासी श्रीमती अनीता शाही जो कि 8 महीने की गर्भवती थी वह बेहोशी की हालत में अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल लखनऊ में आयी थी। वह 32 सप्ताह की गर्भवती थी, उन्हें अत्यधिक मात्रा में ब्लीडिंग हो चुकी थी ए.आर.एफ. की सम्भावना लग रही थी। डॉक्टर्स ने उनकी जांच की जिसके बाद पाया की उनका प्लेसेंटा (गर्भनाल), गर्भाशय से बाहर निकल कर यूरिनरी ब्लैडर (मूत्राशय की थैली) को चीरते हुए उसके अंदर तक पहुँच गया था। इस स्थिति को विज्ञान की भाषा में प्लेसेंटा परक्रीटा कहा जाता है। इस स्थिति में माँ और भ्रूण को बचाना डॉक्टरों के लिए चुनौतीपूर्ण था।



अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल की चीफ कंसलटेंट, गाइनेकोलॉजी डॉ. नीलम विनय ने अपने लम्बे अनुभव के चलते मां और भ्रूण दोनों को बचाने के लिए प्लेसेंटा परक्रीटा सर्जरी करने का निर्णय लिया। अत्यधिक ब्लीडिंग हो जाने के कारण यह सर्जरी बहुत जटिल हो गयी थी इसलिए इस सर्जरी को सफलता पूर्वक करने के लिए डॉ. नीलम विनय ने चीफ कंसलटेंट व इंटरवेंशनल रेडियोलोजी डॉ. आर. वी. फड़के तथा सीनियर कंसलटेंट यूरोलॉजी व किडनी ट्रांसप्लांट डॉ. राहुल यादव से मदद ली।


सर्जरी के जोखिम को कम करने के लिए सबसे पहले इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. आर. वी. फड़के ने पहले दोनों आंतरिक इलिएक धमनियों में एंडोवस्कुलर बलून को रखा। उसके बाद मरीज को ओटी टेबल में ले जाया गया जहां एनेस्थिसियोलॉजिस्टों की निगरानी में एनेस्थिसिया दिया गया तब सर्जरी शुरू की गयी।


गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. नीलम विनय ने हिस्टेरोटॉमी कर  8 महीने की प्रीमच्योर बच्ची को बहार निकाला तथा तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ को सौंप दिया। उसके बाद इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. आर. वी. फड़के ने एंडोवस्कुलर बलून से गर्भाशय के रक्त के प्रवाह को ब्लॉक कर दिया। इसके बाद डॉ. नीलम विनय ने हिस्टरेक्टमी कर गर्भाशय को निकाला।  यूरोलॉजिस्ट डॉ. राहुल यादव द्वारा यूरिनरी ब्लैडर को फिर से रीकंस्ट्रक्ट किया।


यह जटिल सर्जरी लगभग 5 घंटे चली।  डॉक्टरों के अथक प्रयासों के कारण महिला व नवजात दोनों को बचा लिया गया। महिला की स्थिति को देखते हुए उसे एक सप्ताह  के लिए आईसीयू में रखा गया व उसके बाद वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।  एक महीने के बाद महिला और बच्चे को स्थिर हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।


अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटलके मैनेजिंग डायरेक्टर व सी.ई.ओ. डॉ. मयंक सोमानी ने कहा कि " मैं अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों की टीम को बधाई देता हूं। यह किसी भी डॉक्टर के लिए बहुत ही सुकूनदायक व गौरवान्वित क्षण होता है जब वह जटिल सर्जरी के साथ साथ भावनात्मकरूप से जुड़े केस को भी सफलतापूर्वक कर लेता है। ऐसा ही कुछ हमारे अपोलोमेडिक्सहॉस्पिटल के डॉक्टरों द्वारा किया गया। इसकी मैं सराहना करता  हूँ। यह सर्जरी ब्लड बैंक, आईसीयू टीम और नियोनेटोलॉजिस्ट के सहयोग के बिना संभव नहीं थी। आप सभी को मैं इस सफल सर्जरी के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूँ ।"


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